Monday, November 16, 2015

म‌न्त्रार्थ परिचय - मही द्यौः

मही द्यौः पृथिवी च न इमं यज्ञं मिमिक्षताम् | पिपृतां नो भरीमभिः |

मही - अति विस्तृत
द्यौः पृथिवी च - द्युलोक ( स्वर्गलोक )  और पृथ्वी
नः - हमारे
इमं यज्ञम् - इस यज्ञ को
मिमिक्षताम् - अपने अपने रसों से पूरण करें
पिपृताम् - पूरण ( तृप्त ) करें
भरीमभिः - पोषणकारी वस्तुओं से

अति विस्तृत पृथ्वी और द्युलोक हमारे इस यज्ञ को अपने अपने रसों से पूरण कर‌ें | पोषण करनेवाली वस्तुओं से हमें तृप्त करें |